भारतीय संघवाद में केन्द्रीय कार्यपालिका का वर्चस्वः कारण और परिणाम
DOI:
https://doi.org/10.32628/IJSRHSSKeywords:
संघवाद, वर्चस्व, नीति आयोग, संघसूची, अवशिष्ट शक्तियाँ, अंतर-सरकारी।Abstract
भारतीय संघवाद संवैधानिक रूप से संघात्मक होने के बावजूद व्यवहार में केन्द्रीकृत स्वरूप प्रदर्शित करता है, जिसमें केन्द्रीय कार्यपालिका की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली रही है। केन्द्र-राज्य संबंधों में संघीय कार्यपालिका को प्राप्त अधिक अधिकार राष्ट्रीय नीति समन्वय में एक ओर जहाँ वृद्धि करते हैं वहीं दूसरी ओर राज्यों की स्वायत्तता एवं संघीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभावों को परिलक्षित करते है। इस शोध का उद्देश्य केन्द्रीय कार्यपालिका के वर्चस्व कें संवैधानिक, राजनीतिक एवं प्रशासनिक कारणों तथा उसके संघ-राज्य संबंधों पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण करना है।
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